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30 अप्रैल को मनाई जाएगी नरसिंह जयंती, जानें पूरी विधि

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हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के सबसे उग्र और शक्तिशाली अवतारों में से एक 'नरसिंह अवतार' की जयंती को लेकर श्रद्धालुओं के मन में अक्सर तारीख को लेकर भ्रम बना रहता है। इस बार भी 29 और 30 अप्रैल को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नरसिंह जयंती (नृसिंह चतुर्दशी) कब मनाई जाएगी? इस सन्देह को दूर करते हुए ज्योतिष विशेषज्ञ सत्य ऋषि ने सटीक तिथि, पूजा विधि और इस व्रत के महत्व को विस्तार से बताया है। क्या है सही तारीख? (पंचांग की गणना) आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल 2026 (बुधवार) को सायंकाल 07 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होगी। यह तिथि अगले दिन 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को रात्रि 09 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी।  धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, 'उदयातिथि' (जिस तिथि पर सूर्योदय हो) को ही किसी भी त्योहार या व्रत को मनाने का आधार माना जाता है। चूंकि 30 अप्रैल को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए नरसिंह जयंती का पावन पर्व 30 अप्रैल 2026, दिन गुरुवार को ही मनाया जाएगा। मिथक और महत्व धार्मिक आस्थ...

30 अप्रैल को मनाई जाएगी नरसिंह जयंती, जानें पूरी विधि

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हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के सबसे उग्र और शक्तिशाली अवतारों में से एक 'नरसिंह अवतार' की जयंती को लेकर श्रद्धालुओं के मन में अक्सर तारीख को लेकर भ्रम बना रहता है। इस बार भी 29 और 30 अप्रैल को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नरसिंह जयंती (नृसिंह चतुर्दशी) कब मनाई जाएगी? इस सन्देह को दूर करते हुए ज्योतिष विशेषज्ञ सत्य ऋषि ने सटीक तिथि, पूजा विधि और इस व्रत के महत्व को विस्तार से बताया है। क्या है सही तारीख? (पंचांग की गणना) आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल 2026 (बुधवार) को सायंकाल 07 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होगी। यह तिथि अगले दिन 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को रात्रि 09 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी।  धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, 'उदयातिथि' (जिस तिथि पर सूर्योदय हो) को ही किसी भी त्योहार या व्रत को मनाने का आधार माना जाता है। चूंकि 30 अप्रैल को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए नरसिंह जयंती का पावन पर्व 30 अप्रैल 2026, दिन गुरुवार को ही मनाया जाएगा। मिथक और महत्व धार्मिक आस्थ...

Origin of Almanac: धार्मिक क्रियाओं के समय निश्चित करने के लिए हुई पंचांग की उत्पत्ति

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सत्य ऋषि Origin of Almanac: देश दुनिया के सभी पंचांगों की उत्पत्ति प्राचीन काल में धार्मिक क्रियाओं के समय निश्चित करने के लिए हुई है। बाद में उनमें सामाजिक उत्सव और वर्तमान काल में राजकीय महत्व के कार्यक्रम भी शामिल किए गए। हमारे समस्त प्राचीन सामाजिक उत्सवों को भी धार्मिक स्वरूप दिया गया है। भारत में कई शताब्दियों से विविध धर्म प्रचलित हैं। इससे हमारे पंचांग भी विविध प्रकार के बने हैं। इनके मुख्य प्रकार (1) हिंदू, (2) इस्लाम, (3) पारसी और (4) खिष्टीय है। आज के हिंदू पंचांगों के भी करीब 30 प्रकार पाए जाते हैं। हिंदू पंचांगों के अतिरिक्त अन्य (इस्लामी आदि) पंचांगों में गणित का विषय बहुत कम आता है। इससे हमारी अधिकतर चर्चा हिंदू पंचांगों के विषय में ही होगी। अत: इस लेख में, जहां अन्यथा न कहा गया हो, वहां "पंचांग" शब्द से हिंदू पंचांग ही समझना चाहिए। गणित की सूक्ष्मता हमारे पंचांगों में उत्सवों और व्रतों के अतिरिक्त ग्रहण, सूर्योदयास्त, इष्ट घटनाओं के समय, आकाश में ग्रहों की स्थिति आदि खगोलीय विषय दिए जाते हैं। खगोलशास्त्र आजकल पश्चिम में इतनी उन्नत स्थिति में आ गया है कि वहां क...